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GOOGLE RULE BOOK

Google , आप और आपकी सोच !Last Updated:May 14, 2013ByGopal Mishra47 CommentsFriends, अगर  आप  पिछले  कुछ  समय  से  AKCके  reader हैं  तो  शायद  आपने  ध्यान  दिया  होगा  कि जो  articles मैं  खुद  लिखता  हूँ  (not the translations) वो  अमूमन  बहुत  लम्बे  होते  हैं . Actually मैं  intentionally ऐसा  नहीं  करता  ; मेरी   कोशिश  होती  है   कि मैं   अपनी  बात  को  अच्छी   तरह  से  express करूँ ताकि  पढने  वाले  को  वाकई  में  फायदा  हो . और  इसी  कोशिश  में  articles लम्बे  …बहुत  लम्बे  हो  जाते  हैं .पर  इसका  एक  दूसरा  पहलू  भी  है …मेरी  लिखने  की  frequency बहुत  कम  रहती  है …max 2-3 articles per month.  और  ऐसा  इसलिए  नहीं  है  कि  मैं  एक  लेख  लिखने  में  बहुत  अधिक  time लेता  हूँ , नहीं  , बल्कि  मैं  एक  या  दो  sitting ; say 4-5 hours में  एक आर्टिकल  कम्पलीट  कर  लेता  हूँ …पर  मैं  लिखता  तभी  हूँ  जब  कोई  बात मुझे बहुत  अधिक  appeal करती   हो . और  इसी  वजह  से  मैं  ऐसी  कई   छोटी  -छोटी   बातें   जो  appeal तो  करती  हैं  पर  शायद  उस   हद्द   तक   नहीं  को  pass होने   देता   हूँ , और   उसपर   कुछ  नहीं  लिखता .पर  अब  मैंने  अपनी  writing style के  साथ  थोडा  experiment करने  का  सोचा  है …अगले कुछ  दिनों  तक  मैं  short length articles more  frequently publish करूँगा …और  अगर  सही  लगा  तो  इसे  continue भी  करूँगा . Of course जब  भी  कुछ  बहुत  appealing mind में  आएगा  तो  आपको   फिर  से   super-long articles bear  करने  होंगे :).Well, तो  चलिए  अब  इन  short length  या ये कहें कि not so long articles की  शुरआत इस लेख से  करते हैं :Your Input Decides Your OutputGoogle , आप और आपकी सोच !आपका  दिमाग Google की  तरह  काम  करता  है ; या  ये  कहें  कि  Google आपके  दिमाग  की  तरह  काम  करता  है .  खैर  जो  भी  हो  , वो  important नहीं  है  ; important ये  है  कि  हम  अपने  दिमाग  की  processing  को  समझें  और  उसे  अपने  favour में  use करें .अगर  आप  अभी  इस  site को  internet पे  पढ़  रहे  हैं  तो  मैं  99.99% confidence के  साथ  कह  सकता  हूँ  कि  आप  Google use करते  होंगे .   और most probably  आप  पहली  बार  या  फिर  आज  भी  इस  site पर  Google use कर  के  ही  आये  होंगे .loading...हम  Google क्यों  use करते  हैं ?अपने  मतलब  की  चीज  internet पर  खोजने  के  लिए .हम  गूगल  कैसे  use करते  हैं ?हमें  जो  खोजना  होता  है  उसके  instructions Google को  देते  हैं  और  वो  हमारे  सामने  उससे  related results display कर  देता  है .यानि  हमारा  output हमारे  input पर  depend करता  है .Now  let’s do a small exercise:आप  Google पर  type करिए  : “ Why India is good”Results पर  ध्यान  दीजिये .अब  टाइप  करिए  , “Why India is bad”Results देखिये .क्या  हुआ …जो  खोजा  वो  पाया … isn’t it?Exercise को  continue करते  हैं :आँखे  बंद  करिए  और  अपने  mind से  पूछिए  , “ Why India is good?”Mind में  जो  pictures आ  रही  हैं  उसपर  ध्यान  दीजिये . क्या  दिखा … culture, temple, Bollywood , मौसम , नेचुरल ब्यूटी , सचिन तेंदुलकर, family, people…एक  बार  फिर  आँखें  बंद  करिए  और  mind से  question करिए , “Why India is bad?”क्या  दिखा ….गरीबी , corruption, rape , सडकें , बिजली, … जो  खोजेंगे  वो  मिलेगा …but problem ये  है  कि  हमें  कमियां  और  बुराइयाँ  खोजने  की  आदत  सी  पड़ गयी  है …Even अगर हम ऊपर के example  की बात करें तो बहुत से लोगों (including  me ) ने जब ” Why India is good ” सोचा होगा तो mind  की  processing slow  रही होगी…थोडा जोर लगाना पड़ा होगा कि अच्छा  क्या है , पर बुराई तुरंत दिखी होगी…ऐसा शायद हमारे एनवायरनमेंट की वजह से है ,जहाँ हमेशा negative news को ही अधिक coverage दी जाती है..but the important thing is कि थोडा खोजने पर अच्छाई भी दिख जाती है.                                   इतना याद रखिये की न गूगल और ना हमारा दिमाग हमें गलत रिजल्ट दिखायेगा….जब “good” खोजेंगे तो “good” दिखेगा, जब “bad” सोचेंगे तो “bad” दिखेगा… वे हम रोकेंगे नहीं कि, “अरे आप , अच्छी चीज क्यों नहीं खोज रहे,” या ऐसा  नहीं करेंगे कि आप बुरी चीज खोजें तो खुद से आपको अच्छी चीज दिखा दें..इसलिएहमें खुद ही अलर्ट रहना होगा, और जैसा हम चाहते हैं वैसा ही सोचना होगा…Friends, अगर  हमे  life में  कुछ  बड़ा  करना  है  तो  हमें अच्छा खोजने की आदत डालनी ही होगी..positive सोचना  होगा ….हर  situation में  दिमाग  को  सही  instructions देने  होंगे…क्योंकि आपका input  ही आपका output decide  करता है …कंप्यूटर पे ही नहीं लाइफ में भी…हम  ये  नहीं  कहेंगे  कि  , “ मैं  ये  क्यों  नहीं  कर  सकता  ?” हम  ये  कहेंगे  कि  “ मैं  ये  क्यों  कर  सकता  हूँ ?”हम  ये  नहीं  दोहराएंगे  कि  “luck खराब  है ”, हम  ये  सोचेंगे  कि , “हम कितने  lucky हैं ”हम इस पर दिमाग खर्च करेंगे कि  “सामने  वाला अच्छा  क्यों  है ”, इस पर  नहीं  कि  “ वो  बुरा  क्यों  है..”I believe, हम  भगवान्  की  बनायी हुई  सबसे  नायाब  creation हैं , उसने  हमें  वो  सारी   खूबियाँ  दी  हैं    जो  इस  life को  शानदार  बनाने  के  लिए  काफी  हैं …जो  लोग  इनका  use  सही  ढंगसे  करते  हैं  वो  महान  बन  जाते  हैं  और  जो  नहीं  करते  वो  आम रह  जाते  हैं ….Let’s not becom />
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google me bare ma janne ka life aap comment kr shakte hai

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